भगवान श्री राम के मुख्य मंदिर



सूर्यवंशी और अयोध्या में जन्मे विष्णु भगवान के अवतार श्री राम को भारत में त्रेता युग से ही पूजा जाता है | इनके साथ साथ इनके परम सखा और भक्त श्री हनुमान की भी पूजा की जाती है | भारत में लगभग हर मंदिर में श्री राम के साथ माता सीता भाई लखन या यूँ कहे की पुरे रामपरिवार की पूजा की जाती है | आज हम आपको भगवान श्री राम के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और मुख्य मंदिरों के बारे में बताएँगे :

मुख्य श्री राम मन्दिरो की जानकारी

अयोध्या में कनक महल मंदिर :

यह महल भी है और मंदिर भी | और इसका संबध सीधे श्री राम और उनके परिवार से है | माना जाता है की इस महल को माता कैकई ने सीता को विवाह के बाद मुँह दिखाई में दिया था | उस समय यह अयोध्या में सबसे दिव्य महलों में से एक था | त्रेता युग में श्री राम के धरती से लौट आने पर उनके पुत्र कुश ने इस महल में अपने माता पिता सीता राम की मूर्तियाँ स्थापित की | समय के साथ यह महल जर्जर होता रहा तो पुनः भी सुधारा गया |

रामास्वामी मन्दिर - कुंभकोणम

तमिलनाडु के थंजावूर जिले में स्थित कुंभकोणम में यह मंदिर श्री राम को समर्प्रित है | मंदिर का निर्माण सोलवी शताब्दी में नयक्कर राजाओं ने करवाया है , मंदिर की बनावट नायक कालीन वास्तुकला शैली में की गयी है | मंदिर में रामायण को चित्रों से के माध्यम से दिखाया गया है | मंदिर में 64 खम्बे लगे हुए है | मंदिर में श्री राम दरबार लगा हुआ है जिसमे श्री राम , माँ सीता , भाई लक्ष्मण , भरत शत्रुधन और हनुमान जी है |

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श्री सीतारामचंद्र स्वामी मंदिर भद्राचलम

श्री राम और जानकी माँ को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। यह पर्णशाला गाँव से ३५ किमी की दुरी पर है | माना जाता है की यहा भगवान श्री राम ने लक्ष्मण और सीता के साथ वनवास के कुछ पल बिताते थे | यह मंदिर आन्ध्र प्रदेश के खम्मम ज़िले में भद्राचलम में स्थित है | इस जगह को भगवान राम के भक्त दक्षिण की अयोध्या भी कहते है | यह भी विश्वास किया जाता है की रावण ने यही से माता सीता का अपहरण किया था |


कोदंडा रामास्वामी मंदिर - चिकमंगलूर

कोदंडा रामास्वामी मंदिर भगवान श्री राम को समर्प्रित मंदिर है जो कदापा जिले के वोनतीमित्ता कस्बे में है | सोलवी शताब्दी में बना यह मंदिर इस क्षेत्र का सबसे विशाल मंदिर है | यह मंदिर दो लुटेरो ने बनाया था जो बाद में श्री राम के भक्त बन गये थे उनके नाम वोंतुदु और मित्तुदु था |

त्रिप्रायर श्री राम मंदिर :

भारत के दक्षिण में केरल के दक्षिण-पश्चिमी शहर त्रिप्प्रयार (त्रिप्रायर) में यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है | यह त्रिप्रायर नदी के किनारे कोडुन्गल्लुर पर है | माना जाता है की यहा के मुखिया को एक मूर्ति नदी तट पर मिली जिसमे त्रिदेवो के तत्व थे | अत: इसकी स्थापना के बाद इसकी पूजा त्रिमूर्ति के रूप मे की जाती है | मंदिर के गर्भगृह में रामायण के चित्र बने हुए है और लकड़ी की नक्काशी शानदार की गयी है | यहा कोट्टू (नाटक) प्रसिद्ध है |

रघुनाथ मंदिर जम्मू कश्मीर :

उत्तर भारत के श्री राम मंदिरों में इस मंदिर को विशेष स्थान प्राप्त है जो जम्मू कश्मीर के जम्मू में स्थित है | इस मंदिर में मुख्य आराध्य देव भगवान् श्री रामचंद्र ही है | मंदिर के अन्दर शानदार नक़्क़ाशी की गयी है | भीतर की दीवारे सोने की बनाई गयी है | 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने इस मंदिर को बनवाना शुरू किया था जिसे आगे महाराजा रणजीतसिंह ने आगे बढ़वाया | रामायण काल के कई देवी देवताओ के मंदिर भी यही आस पास में बने हुए है |

चित्रकूट का राम मंदिर :

श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे जिसे आजकल इलाहाबाद कहा जाता है | यह तीन महानदियो के संगम होने के कारण हिन्दुओ का पवित्र तीर्थ स्थल है | यमुना के पार चित्रकूट है जहा वे कई दिनों तक अनुसूया के आश्रम में रहे | यहां पर रामघाट, जानकी कुंड, हनुमानधारा, गुप्त गोदावरी आदि ऐसे कई स्थल हैं।

पंचवटी में राम

नासिक का यह स्थान श्री राम के वनवास का सबसे बड़ा यादगार स्थान है | यह पहले दंडक वन के नाम से जाना जाता था | इसी जगह लक्षमण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। नासिक में गोदावरी के तट पर 5 वृक्षों का स्थान पंचवटी कहा जाता है जो है आंवला, बेल ,अशोक , बरगद और पीपल | यह मान्यता है की यह वृक्ष स्वयं श्री राम और लक्ष्मण ने अपने हाथो से लगाये थे |

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