कौन है हनुमान जी और इनकी महिमा



आइये जानते है श्री हनुमान जी की महिमा और शक्तियों के बारे में | हनुमान जी को हिन्दू देवताओ में सबसे शक्तिशाली माना गया है | वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे | माना जाता है की हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारवे रूद्र अवतार थे जो श्री राम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे |
श्री हनुमान जी के बारे में बजरंग बलि , मारुतिनंदन , पवनपुत्र , केशरीनंदन आदि इनके अनेको नाम है | इन्हे सात चिरंजिवियो में से एक माना जाता है | यह सभी कलायो में माहिर थे | वीरो में वीर , बुधिजीवियो में सबसे विद्वान श्री हनुमान हमेशा रहे है | इन्होने अपने पराक्रम और विद्या से अनेको कार्य चुटकी भर समय में पूर्ण कर दिए है |
श्री हनुमान अपने शरीर को किसी भी वेश में किसी भी रूप में बदल सकते थे | वे अपने शरीर को पर्वत की तरह बड़ा सकते थे तो अगले ही पल अपने शरीर को नाख़ून से भी छोटे कर सकते थे | एक छलांग में वो हिन्द महासागर को पार कर सकते थे | वे राक्षसों , दानवो भूतो , चुडेलो के कट्टर विरोधी पर नाशक थे | यह दानवीय शक्तिया बालाजी से भय खाती थी | वे वेदों और धार्मिक ग्रंथो के महा पंडित भी थे |

हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :

केशरीनंदन : पिता केशरी के पुत्र होने के कारण इन्हे केशरीनंदन कहा जाता है |

मारुतीनंदन : मारुती का मतलब हवा , पवन से है | पवन देव के मुहबोले पुत्र होने से इन्हे मारुतिनंदन के नाम से भी पुकारा जाता है |

पवनपुत्र : पवन देव के पुत्र

अन्जनाये : माँ अंजना के पुत्र होने के कारण

महावीर : महाबली होने के कारण

संकट मोचक : संकट में साथ निभाकर संकट से पार लगाने के कारण

बालाजी :

हनुमंते :




भगवान् हनुमान का जन्म और बच्चपन :

चैत्र महीने के शुक्ल अष्टमी को हनुमान सुबह 4 बजे अपनी माँ अंजना के गर्भ से इस धरती पर त्रेता युग में भगवान शिव के अवतार के अवतरित हुए |

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हनुमान जी का सूर्य को निगलना :

एक बार बच्चपन में श्री हनुमान जी बहूत भूखे थे पर उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिल पा रहा था | उन्होंने हर जगह तलाश करी , पर कोई खाने का ऐसा भोज्य ऐसा नहीं मिला तो हनु की भूख मिटा सके | तब उने आकाश में लाल रंग की कुछ चीज़ चमकती हुई दिखाई दी | भूखवश उन्हें यह कोई पका हुआ फल प्रतीत हुआ | श्री हनुमान ने उस फल को खाने की चाह रखी और एक लम्बी सी छलांग मार कर उस लाल फल के करीब पहुचने लगे | वो लाल फल कोई और नहीं खुद सूर्य देवता थे | उन्होंने उस बालक को अपने समीप आते देखा तो उन्हें लगा की यह बालक मायावी है और उन्हें नुकशान पंहुचा सकता है | उन्होंने भगवान् इंद्र से अपने बचाव के लिए विनती करी | इंद्र ने अपने शक्तिशाली वज्र से बालक की ठोड़ी पर आक्रमण किया | हनु इस प्रहार से बेहोश होकर धरती पर गिर गये | जब इस घटना का पवन देव को पता चला तब अपने पुत्र की इस दुर्दशा पर उन्होंने अपनी समस्त पवन को इस ब्रह्माण्ड में बहने से रोक लिया | हर तरफ हवा के रुकने से जन जीवन अस्त वस्त होने लग गया | जीव जन्तुओ का सांस लेना दुर्लब हो गया | ब्रह्मा सहित सभी देवता उस जगह पहुचे जहा बालक हनुमान अचेतन अवस्था में पड़े थे | देव इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने कुछ दिव्य मंत्र से बालक हनुमान को चेतन अवस्था में ले लाये | एक एक कर सभी देवताओ ने अपनी दिव्य शक्तिया हनुमान को प्रदान की | इंद्र के वज्र सहने से इनका नाम बजरंग भी रख दिया गया | पवन देव अपने पुत्र को खुशाल पाकर खुश हुए और फिर से ब्रह्माण्ड में पवन बहने लगी |

पूर्ण समर्प्रित भक्त श्री राम के :

कहा जाता है की श्री हनुमानजी का जन्म ही राम भक्ति और उनके कार्यो को पूर्ण करने के लिए हुआ है | उनकी हर सांस में हर खून की बूंद में राम बसे है | एक प्रसंग में विभीषण के ताना मारने पर हनुमानजी ने सीना चिर कर भरी सभा में राम और जानकी के दर्शन अपने सीने में करा दिए थे | भगवान श्री राम और लक्ष्मण से किशकिन्दा में मिले जब वो दोनों माता सीता की तलाश कर रहे थे | श्री हनुमान वानरराज सुग्रीव के परम मित्र और उनकी वानर सेना के सेनापति थे अपरहण के बाद माता सीता से भेट करने वाले राम के प्रथम दूत श्री हनुमान ही थे |


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